एक स्वीकारोक्ति से शुरू करती हूँ। हमारी संस्कृति में साठ के बाद के लोगों की अंतरंगता पर बात ही नहीं होती। जैसे वह अस्तित्व में नहीं है। जैसे सत्तर का जोड़ा एक-दूसरे को छूता तक नहीं।
यह झूठ है। और इस झूठ की क़ीमत अकेले रहने वाले साठ-पार के लोग चुकाते हैं।
साठ के बाद शरीर सच्ची भाषा बोलता है
पहले समझ लीजिए — आपका शरीर साठ पर वह नहीं है जो तीस पर था। यह विफलता नहीं, तथ्य है। हार्मोन बदले हैं। ऊर्जा की लय बदली है। कुछ दवाइयाँ शायद आप लेते हैं — रक्तचाप की, मधुमेह की, दिल की — उनका असर यौन जीवन पर पड़ता है।
नए साथी से मिलने पर यह असली सवाल है, छुपाने वाला नहीं। "मेरी यह दवा है, इसका यह असर है" — यह बात सच में कहनी होती है। तीसरी या चौथी मुलाक़ात पर, जब थोड़ा विश्वास बन गया हो।
पहली बात — डॉक्टर से
नए रिश्ते में आने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से खुलकर बात कीजिए। उन्हें बताइए कि आप फिर से रिश्ते में आ सकते हैं। वे आपकी दवाइयों की समीक्षा करेंगे। कुछ समायोजन संभव हो सकता है।
पुरुषों के लिए — अगर उत्तेजन में परेशानी है, तो उसका इलाज है। शर्म की बात नहीं। नज़दीक के एक अच्छे यूरोलॉजिस्ट से मिलिए। महिलाओं के लिए — रजोनिवृत्ति के बाद योनि की सूखापन सामान्य है, और उसका भी सरल इलाज है। अच्छे स्त्री-रोग-विशेषज्ञ से बात कीजिए।
यौन स्वास्थ्य और सुरक्षा
यह बात कड़वी लग सकती है मगर ज़रूरी है। साठ के बाद भी यौन-संक्रमित रोग होते हैं। अगर आप नए साथी से यौन संबंध बना रहे हैं, तो दोनों को जाँच करानी चाहिए। HIV, हेपाटाइटिस, और अन्य। यह कोई अविश्वास नहीं, यह ज़िम्मेदारी है।
कंडोम का प्रयोग इस उम्र में भी ज़रूरी है — गर्भनिरोध के लिए नहीं, सुरक्षा के लिए।
धीमी शुरुआत
साठ के बाद अंतरंगता शुरू करने का क्रम तीस से अलग है। तीस पर जुनून तेज़ था। साठ पर ठहराव है। यह कम नहीं है, अलग है।
- पहले छूना सीखिए। हाथ पकड़ना, कंधे पर हाथ, गले मिलना। कई महीने लग सकते हैं यहाँ तक पहुँचने में। जल्दी नहीं।
- बिस्तर से पहले बिस्तर के बाहर की अंतरंगता। साथ टहलना, एक-दूसरे के लिए चाय बनाना, रात को फ़ोन पर आवाज़ सुनना। ये गहरे कनेक्शन हैं।
- पहली बार जब शारीरिक संबंध बने, अपेक्षा छोड़ दीजिए। पहली बार शायद अजीब लगे। दो अनजान शरीर, साठ के बाद, कुछ डर, कुछ याद। यह सामान्य है।
जो होगा वह नया है
आपके पहले साथी के साथ एक लय थी — शायद तीस साल की। नए व्यक्ति के साथ वह लय नहीं होगी। तुलना नहीं करनी। यह जीवन का अलग अध्याय है।
कुछ पाठकों ने बताया कि पहली बार उन्हें "धोखा" देने का अहसास हुआ। यह नैतिक धोखा नहीं है। आपका पहला साथी चला गया है — यह शरीर की नई यात्रा है।
बातचीत कैसे करें
भारतीय संदर्भ में "क्या तुम्हें यह पसंद है" सीधे पूछना मुश्किल होता है। हमें यह सिखाया नहीं गया।
एक तरीक़ा — प्रश्न के बदले अवलोकन। "जब तुमने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा, मुझे अच्छा लगा।" यह कहना आसान है, और उसी रास्ते को फिर खोलता है।
दूसरा तरीक़ा — "हम अगली बार थोड़ा धीरे चलें?" यह कहना सीधा नहीं, मगर स्पष्ट है।
अगर शारीरिक संबंध अब न हों
कुछ जोड़े साठ के बाद मिलते हैं और शारीरिक संबंध उनका मुख्य हिस्सा नहीं होता। वे रोज़ साथ बैठते हैं, एक-दूसरे का हाथ पकड़ते हैं, साथ सोते हैं, मगर संबंध अलग रूप में है।
यह भी मान्य है। साठ के बाद अंतरंगता का माप "कितनी बार" नहीं, "कितना जुड़ाव" है।
बेंगलुरु इंदिरानगर की एक 66 साल की पाठिका ने कहा: "हम सालों से साथ सोते हैं, गले मिलते हैं, एक-दूसरे का पाँव छूते हैं। शारीरिक संबंध अब कम है, मगर निकटता पहले से ज़्यादा।"
एक कठिन सच्चाई
अगर आपके नए साथी को शारीरिक संबंध चाहिए और आपको नहीं, या उल्टा — तो यह बातचीत ज़रूरी है। छुपाना ग़लत है। कुछ रिश्ते इस कारण टूटते हैं, और यह दुखद है, मगर दोनों को अपनी सच्चाई के साथ जीने का हक़ है।
इसी तरह अगर कोई चिकित्सीय समस्या है — पुरुष के लिए इरेक्शन, महिला के लिए दर्द — तो बताना होता है। छुपाकर रिश्ता नहीं चलता।
बच्चों की नज़र
एक अजीब बात — बड़े बच्चे अक्सर इस विचार से असहज हैं कि उनके बूढ़े माता-पिता अब भी शारीरिक रूप से सक्रिय हैं। उनकी असहजता आपकी ज़िम्मेदारी नहीं। आपकी ज़िंदगी उनके लिए नहीं जी जानी।
आप कोई घोषणा नहीं करते, आप कुछ छुपाते भी नहीं। जैसे वे अपने रिश्तों में निजी हैं, वैसे आप अपने।
पहली बात कहाँ से शुरू करें
अगर आप किसी नए व्यक्ति के साथ हैं और यह बातचीत करनी है, तो कैफ़े में नहीं, घर में नहीं, बिस्तर में नहीं। टहलते हुए कीजिए। चलते-चलते मुश्किल बातें आसान होती हैं।
कहिए — "हमारी उम्र में शरीर अलग है। मैं चाहूँगा कि हम इसके बारे में भी खुले में बात कर सकें।" फिर चुप रहिए। सामने वाले को बोलने दीजिए।
साठ के बाद की अंतरंगता धीमे संगीत की तरह है। इसमें ठहराव है, और ठहराव का अपना सौंदर्य है। आप उस संगीत के हक़दार हैं।